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हैम्पटा पास और चंद्रताल लेक - नेचुरल ब्यूटी और एडवेंचर

घूमने-फिरने वाली ऐसी कई सारी जगहें हैं जो एडवेंचर के साथ अपनी नेचुरल ब्यूटी के लिए भी फेमस हैं। यहां जाना जितना खतरनाक है, उतना ही मजेदार भी। ऐसी ही जगह है हैम्पटा पास और चंद्रताल लेक, जहां बर्फ से ढंके पहाड़ों, नदियों और झीलों को देखना एक अलग ही शांति और सुकून का अहसास देता है। यहां और किन जगहों पर जाएं और कहां घूमें, कहां ठहरें, जानते हैं


चंद्रताल का ट्रैक
Tourist Places

हैम्पटा पास कुल्लू और लाहुल की घाटियों को जोड़ता है। हैम्पटा पास और चंद्रताल की यात्रा के लिए पांच दिन का समय निकाल कर जाएं, जिससे वहां के मौसम, ऊंचे पहाड़ों और नेचुरल ब्यूटी का सही मायने में आनंद ले सकें। चिका जाने के लिए एक छोटे-से गांव जोबरी के आगे मनाली से सफर शुरू होता है। ये रास्ता तीन घंटे का है, जिसमें पूरे रास्ते हरियाली का आनंद उठाया जा सकता है। ये सफर नदी के पास नाइट कैंप पर खत्म होता है। 14,000 फीट की ऊंचाई से नेचुरल ब्यूटी को देखना एक अलग ही एक्सपीरिएंस है। हैम्पटा पास के 26 किमी के ट्रैक पर चारों ओर बर्फ से ढंके पहाड़, हरे-भरे जंगल और कल-कल करती नदियों को देखते रास्ता आसानी से कट जाता है।
घुमावदार पहाड़ियां

दूसरे दिन का सफर पहले दिन की अपेक्षा ज्यादा एडवेंचरस और एक्साइटिंग है। इसमें ‘बालू का घेरा’ पहुंचने में 5 घंटे का समय लगता है। पूरे रास्ते में फूल, पक्षी और तेजी से बहती नदियां मन को मोह लेती हैं। तीसरे दिन घुमावदार पहाड़ियों से होते हुए 14 किमी के सफर के दौरान हैम्पटा पास पहुंचेंगे। वहां चारों तरफ बर्फ के ही पहाड़ दिखेंगे।
एडवेंचर से भरे पहाड़ और झील
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पूरा रास्ता बर्फ के पहाड़ों (दियो, टिब्बा और इंद्रसन चोटियां) से घिरा हुआ है। यहां से रास्ता स्पीति घाटी को जाता है। हैम्पटा के आगे सियागोरू पहुंचने पर 12 किमी लंबे ‘बारा शिंगरी ग्लेशियर' और खुले आसमान को देखकर शांति और सुकून का अहसास होता है। सफर के चौथे दिन चट्टानी इलाके और फास्ट रैपिड्स में चलना खतरे और एडवेंचर से भरपूर है। चत्रू (मनाली-काजा हाईवे) जाते हुए चंद्र नदी को आसानी से देखा जा सकता है। चंद्रताल चत्रू से 70 किमी दूर है। चार से पांच घंटे के सफर के बाद ऊंचे पहाड़ों से ढंकी हुई झील नजर आती है। यहां ओवरनाइट कैंपिंग की सुविधा भी है। कुछ देर रुकने के बाद यहां से मनाली के लिए भी निकला जा सकता है।
कैसे पहुंचें?
दिल्ली से बस से आप मनाली पहुंच सकते हैं। बस डिपो से हर घंटे पर बसें मिलती हैं। हिमाचल सड़क परिवहन निगम भी दिल्ली में हिमाचल भवन से प्रत्येक दिन मनाली के लिए वॉल्वो बसें चलाता है। मनाली से 50 किमी की दूरी पर जोगिंदर रेलवे स्टेशन है। यहां से भुंटर एयरपोर्ट भी 50 किमी दूर है।
कहां ठहरें?
टेंट या कैंप में रुका जा सकता है। यहां पक्के घर नहीं मिलते। मनाली में कम बजट से लेकर आलीशान होटलों तक की सुविधा मौजूद है। अपने बजट के अनुसार होटल चुना जा सकता है या फिर हिमाचल पर्यटन रिजॉर्ट में भी ठहर सकते हैं।
क्या खरीदें?
मनाली से गर्म कपड़े, बेक्ड फूड, कैंपिंग और एडवेंचर का सामान खरीद सकते हैं। रास्ते में अखरोट, ओक, चेस्टनट्स और सेब ले सकते हैं।

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